महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट


एक जीवंत विरासत — एक साझा सांस्कृतिक उत्तरदायित्व

महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट, महाकवि जयशंकर प्रसाद की प्रपौत्री डॉ. कविता प्रसाद के नेतृत्व में, भारत की साहित्यिक आत्मा और सांस्कृतिक चेतना का एक सशक्त प्रतीक है। यह ट्रस्ट आधुनिक हिंदी साहित्य के महानतम साधक महाकवि जयशंकर प्रसाद (1890–1937) की अमर विरासत को संरक्षित, संवर्धित और सतत् रूप से जीवंत रखने के लिए समर्पित है।

कामायनी का दार्शनिक उत्कर्ष, आँसू की भावप्रवण वेदना, ध्रुवस्वामिनी की नारी-चेतना और चंद्रगुप्त का राष्ट्रबोध—ये केवल साहित्यिक कृतियाँ नहीं, बल्कि भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक चेतना की आधारशिलाएँ हैं। महाकवि प्रसाद का साहित्य आज भी मानवता, नैतिकता और सौंदर्य-बोध का पथ प्रशस्त करता है।

यह ट्रस्ट केवल स्मृति-संरक्षण तक सीमित नहीं है—यह संस्कृति को एक जीवंत, प्रेरक और सक्रिय शक्ति के रूप में समाज से जोड़ने का सतत् प्रयास है। दुर्लभ पांडुलिपियों का संरक्षण एवं डिजिटलीकरण, गंभीर शोध-परियोजनाएँ, उच्चस्तरीय प्रकाशन, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियाँ, सांस्कृतिक महोत्सव और शैक्षणिक कार्यक्रम—इन सभी के माध्यम से ट्रस्ट विरासत को भविष्य की चेतना में रूपांतरित करता है।

ट्रस्ट का प्रमुख आयोजन “साहित्य–संस्कृति संवाद महोत्सव” भारत के श्रेष्ठ कवियों, नाटककारों, संगीतज्ञों, विचारकों और शोधार्थियों को एक मंच पर लाकर परंपरा और नवाचार के बीच सशक्त संवाद स्थापित करता है।

युवा रचनात्मक प्रतिभाओं के लिए छात्रवृत्तियाँ, साहित्यिक फेलोशिप्स, कार्यशालाएँ और मार्गदर्शन कार्यक्रम ट्रस्ट की मूल प्राथमिकता हैं। साथ ही, कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के अंतर्गत सहयोग को आमंत्रित कर साहित्य और संस्कृति को राष्ट्र-निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ा जाता है। प्रत्येक सहयोग—दान, प्रायोजन या सहभागिता—दुर्लभ धरोहरों की रक्षा, नवलेखकों के सशक्तीकरण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के वैश्विक प्रसार में प्रत्यक्ष योगदान है।

आज के तेज़ी से बदलते और जड़ों से कटते विश्व में, महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट साहित्यिक विवेक, सांस्कृतिक अस्मिता और सृजनात्मक ऊर्जा का एक उज्ज्वल दीपस्तंभ है। इस अभियान से जुड़ना केवल सहयोग नहीं, बल्कि संस्कृति-संरक्षण का संकल्प है।


हमें समर्थन क्यों दें?

◆ राष्ट्रीय धरोहर का संरक्षण
महाकवि जयशंकर प्रसाद की मूल पांडुलिपियों, पत्रों और अप्रकाशित कृतियों को सुरक्षित रखने में सहभागी बनें।

◆ युवाओं का सशक्तीकरण
उभरते लेखकों, कलाकारों और शोधार्थियों के लिए छात्रवृत्तियाँ, फेलोशिप्स और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का समर्थन करें।

◆ संस्कृति का संवर्धन
साहित्यिक महोत्सवों, संगोष्ठियों और जन-सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से विरासत को जन-जन तक पहुँचाने में सहयोग दें।

◆ वैश्विक प्रभाव
भारतीय साहित्य, दर्शन और सांस्कृतिक चेतना को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिष्ठित करने में भागीदार बनें।


आइए, हमारे साथ जुड़िए | हमारी साझी विरासत के संरक्षक बनिए

महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट का समर्थन करके आप केवल अतीत की रक्षा नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सांस्कृतिक भविष्य को भी सशक्त बनाते हैं। आइए, मिलकर यह सुनिश्चित करें कि साहित्य, संवेदना और सृजन की यह अखंड ज्योति सदैव प्रज्ज्वलित रहे।

“किसी राष्ट्र की आत्मा उसकी संस्कृति में निवास करती है—
उस आत्मा को जीवित रखने का दायित्व हम सबका है।”
डॉ. कविता प्रसाद

महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट

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